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कार्यक्रम

13 - 14 सितंबर को विश्व हिंदी परिषद द्वारा दिल्ली स्थित एनडीएमसी सभागार में होने वाले 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन' का छायाचित्र

13 - 14 सितंबर को विश्व हिंदी परिषद द्वारा दिल्ली स्थित एनडीएमसी सभागार में होने वाले 'अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन' का छायाचित्र

 

 डाउनलोड करने का लिंक नीचे है।

 

https://drive.google.com/drive/folders/13iGCDKl5OAVOpf2UQqD9N14a1Jgg5ntH?usp=sharing

 

विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री के.एम. सिंह, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एन.एच.पी.सी. के वक्तव्य

विशिष्ट अतिथि के रूप में श्री के.एम. सिंह जी ने कहा कि हम हिन्दीभाषी हैं और आज यहाँ उपस्थित सभी दर्शकगण भी हिन्दी प्रेमी हैं। हिन्दी के प्रति आपकी आस्था को करबद्ध प्रणाम करता हूँ साथ ही साथ शुभकामनाएँ भी देता हँू। भाषाई खाई को पाट कर ‘हिन्दी’ को सर्वोच्च स्थान मिले, ऐसी मेरी आकांक्षा है और इसमें जब भी मेरी जरूरत पड़ेगी, मैं तत्पर रहूँगा।

मुख्य अतिथि के रूप में श्री प्रभास कुमार झा, सचिव, राजभाषा विभाग के वक्तव्य

विश्व हिन्दी परिषद के महासचिव डा. बिपिन कुमार की हिन्दी के लिए की जा रही सतत संघर्षपूर्ण भूमिका अत्यंत सराहनीय है। हिन्दी के प्रति उनकी दृढ़ता, अवचेतनता, अविस्मरणीय दृष्टिगोचर होती है। इस पुनीत कार्य में, इस राष्ट्रीय यज्ञ में मैं अपनी नैतिक आहुति देने को तत्पर हूं और सदैव रहूँगा। इस कार्यक्रम में हिन्दी प्रेमियों की विशाल उपस्थिति बेहद प्रशंसनीय है।

मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमति मीनाक्षी लेखी के उद्गार

‘हिन्दी के वैश्विक प्रचलन को बढ़ाने में पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी, माननीय नरसिम्हा राव जी, विदेश मंत्री माननीया श्रीमति सुषमा स्वराज जी एवं वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का अग्रणी स्थान रहा है। श्रीमति लेखी जी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि ‘हिन्दी’ को अपनी माँ के समान समझें। उससे प्रेम करना चाहिए एवं उसकी सेवा करनी चाहिए तभी हम वास्तव में इसे राजभाषा से राष्ट्रभाषा के रूप में सुशोभित कर सकेंगे।

मुख्य अतिथि के रूप में डा. अरूण कुमार, सांसद-जहानाबाद के अभिभाषण

अपने संबोधन में डा. अरूण कुमार जी ने कहा कि ‘हिन्दी’ पवित्र गंगा के समान है, यह तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, भोजपुरी, अवधी, ब्रज, मैथिली इत्यादि सबको अपने आँचल में समेटती व समाहित करती है। ‘हिन्दी’ संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा का दर्जा शीघ्र प्राप्त करेगी, ऐसा मुझे भी विश्वास है, किन्तु पहले यह हमारे दिल की भाषा बने, अंतःकरण की भाषा बने, ऐसी मेरी कामना है।

मुख्य वक्ता के रूप में श्री तरूण विजय, सांसद-राज्यसभा के उद्गार

श्री तरूण विजय जी ने अपने उद्बोधन की शुरूआत सभागार में उपस्थित हिन्दी प्रेमियों का अभिनंदन करके किया। उन्होंने कहा कि मैं विश्व हिन्दी परिषद के महासचिव डा. बिपिन कुमार जी का विशेष आभार प्रकट करता हूं। कैलाश मानसरोवर की आध्यात्मिक यात्रा का एक वृतांत सुनाते हुए कहा कि जब मैं तिब्बत से गुजर रहा था, तब किसी अंजान व्यक्ति ने मुझे भाई साहब कह कर पुकारा, मैं आश्चर्यचकित रह गया कि तिब्बत में हिन्दी बोलने वाला कहाँ से आ गया?

प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, महामहिम राज्यपाल, हरियाणा के अध्यक्षीय भाषण

विश्व हिन्दी परिषद द्वारा आयोजित विश्व हिन्दी दिवस एवं कवि सम्मेलन समारोह में हरियाणा के राज्यपाल, महामहिम प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि राष्ट्रध्वज, राष्ट्रगान और राष्ट्रभाषा से किसी देश की विशिष्ट पहचान होती है। हमारे देश का राष्ट्रध्वज और राष्ट्रगान तो है लेकिन राष्ट्रभाषा नहीं है जिसके बिना हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।

डा. बिपिन कुमार, महासचिव, विश्व हिन्दी परिषद का उद्बोधन

विश्व हिन्दी परिषद के महासचिव डा. बिपिन कुमार ने सभागार में उपस्थित अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज का दिन हम राष्ट्रीय पर्व के रूप में विश्व हिन्दी दिवस समारोह मनाते आ रहे हैं। गणमान्य आगंतुकों एवं हजारों हिन्दी-प्रेमियों के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा- ‘हिन्दी’ आज दुनिया में सबसे ज्यादा बोले जानी वाली भाषा बन गई है। वर्तमान में औसतन एक अरब तीस करोड़ लोग हिन्दी बोलते, लिखते व समझते हैं।

विश्‍व हिन्‍दी दिवस-2019

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